कल रात में चिलम की एक लम्बी फूंक मारते हुए मुंशी चाचा ने कसम खा ली की अब चाहे जो हो जाए भाई भ्रष्टाचार मिटा कर ही अगली कश मारेंगे,जोर जोर से चिल्ला कर कह रहे थे की जब साधू-महाराज धुनी रमा कर बैठ सकते हैं तो मुझ जैसा कम पीने वाला आखिर कैसे पीछे रह सकता है,उनकी हाँ में हाँ,साथ बैठे आँखे बंद किये हुए दस्सू यादव भी जोर का दम भर रहे थे,दोनों को चिल्लाते और दांत पीसते देख कर रामजनी लोहार भी देशभक्ति की रौ में आकर सीना ठोक,देश से भ्रष्टाचार को मिटने के लिए बार बार कश ले कर नेताओं को गालीयों में लपेट रहा था.!
दस्सू ने कहा की पहले इसके लिए सिपाही से अनुमति ली जाए,पर ये काम बड़ा ही कठिन था,पुलिस वाला तो बिना लिए दिए कुछ सुनता ही नही,तीनो ने मिलकर सामने वाले रामलीला मैदान की बात तय की,अब आगे की बात पुलिस वाले से कौन करता,किसी की हिम्मत नही हो रही थी,अभी पिछले हफ्ते ही दस्सू और मुंशी जिला जेल से जमानत पर छूटे हैं,ऐसे में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी इस मुहीम ने कहीं उन्हें फिर से जेल में न ठुसवा दे,इसका भय सताने लगा.!
पर मुंशी का दिमाग किसी आइन्स्टाइन से कम नही,उसने कहा की पहले हम भगवा और हरा रंग का चोला पहनगे,फिर पुलिस वालों से बात करेंगे,दस्सू और रामजनी ने केसरिया रंग और मुंशी ने हरा कुरता और सर पर टोपी डाल कर चौकी में तैनात लल्लन ठाकुर से बात करने की हिम्मत जुटाई.!
पर रामजनी की हिम्मत जवाब देनी लगी,कहने लगा की तुम दोनों तो जेल जा चुके हो,मुझे पुलिस वालों से कोई दुश्मनी नही मोल लेनी,इन बाबाओं के चक्कर में मै नही फसने वाला,
रामजनी तो कहने लगा की भाई,इन बाबा भगवान् के चक्कर में मत पड़ो,अपनी तो अफीम और चरस पीतें है और हमको भांग में ही लपेट्वा देते हैं,ई सब बड़े लोगन का बड़ा चोचला है,पर मुंशी चाचा तो अपनी बात के पक्के थे और साथ में दस्सू हो तो कहने ही क्या,चौकी के बहार मान मनौवल का ड्रामा चला,मोहल्ले के चार पांच आदमी उन्हें चौकी के बाहर तक ड्राप करके आ गए.!
पुलिस चौकी के अन्दर के माहौल से तीनो पहले से परिचित थे,इसलिए पहले ही साथ में दारु की छोटी बोतल और चखने के साथ प्रवेश किया,लल्लन चड्डी-बनियान में टेबल पर लात रखे आँख बंद किये आराम कर रहा था,मुंशी ने अभी परसों ही २०० रुपए बतौर तनख्वाह दिए थे लल्लन ठाकुर को,इसलिए उसी ने आवाज़ लगायी...'लल्लन भैय्या हम मुंशी पठान..भैय्या...उठिए'
लल्लन सिपाही को जैसे किसी ने चिकोटी काट ली हो,उठते ही चार पांच टाईप की गाली देते हुए खुद को संभाला,कहा 'क्या हुआ बे,काहे आये हो..'
तीनो धडाम से ज़मीन पे बैठ गये,पर लल्लन ने उनके बदले हुए हुलिए से उन्हें इज्ज़त दी और कहा 'ई का हो गया है,सत्संग-कीर्तन करोगे का..'
रामजनी ने तापाक से उसे बीच में ही रोकते हुए कहा 'नही साहेब,अनशन,करबे हम सब,ई ससुरा भ्रष्टाचार और काले धन के लिए...'
लल्लन की आँखे खुली की खुली रह गयी,कहा ई देशभक्ति का फार्मूला कहाँ से लाये हो,हम तुम्हारी मदद कैसे कर सकते हैं..?
बस साहब,परमिसन दे देव,तो हम कल ही से बैठ जाते हैं.रामलीला मैदान में,दस्सू ने कहा..
लल्लन के भीतर भी देश प्रेम जाग उठा,वो भी करोडो के काले धन को वापिस भारत लेने को बेताब हो गया,दे दी परमिसन..
अब तीनो बहार निकल चुके हैं,पर भूख हड़ताल पर कौन बैठेगा,खोजबीन शुरू हुई,उनको याद आया की पिछले दफे प्रधान जी के खिलाफ रामाधारी केवट जो की गांधीवादी भी है,२० दिन भूख हड़ताल पर बैठा था,उसे तीनो पकड़ लाये,पर वो किसी सूरत में बैठने को तैयार नही था,पिछली बार वो बेचारा बैठ तो गया पर उसे उठाने या मानाने कोई नही आया,आखिर में पुलिस वालों ने उसके नाक में गुलुकोज डाल उसका भूख हड़ताल तोडवाया था.!
दस्सू ने हिम्मत दिखा कर अनशन की शुरुआत की,धीरे धीरे भीड़ जुड़ने लगी,लोगों के भीतर देश हित के लिए ज़ज्बात उमड़ने लगे,अब आगे क्या होगा,ये आने वाला वक़्त बताएगा,पर इस भ्रष्टाचार ने तीन पियक्कड़ों को कुछ अच्छा करने की राह दिखयी,इसलिए इनके लिए भ्रष्टाचार ही अच्छा है,मेरी नज़र में..
WE ARE INCREDIBLE INDIANA :-))
ReplyDeleteREALLY!!!!!
hmm...acha hai...yeh ek na sulajhne wala sawal bankar reh gaya hai.ek aisa zehar hai,jo dhire dhire asar kar raha hai,humare samaj mein,humare vicharo mein aur humari soch mein.
ReplyDelete